शायद इस लिए दफ्तर में कम बैठते थे।
IAS अधिकारी हैं, बाबू नहीं कि दबाव में उन्हें Fourth Class में ट्रांसफर कर दिया जाए!
अगर नगर निगम में इतनी गंभीर अनियमितताएँ चल रही थीं, तो क्या तत्कालीन नगर आयुक्त ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेजकर कार्रवाई की संस्तुति की थी?
अगर नहीं, तो क्यों?
और अगर अनियमितताओं की जानकारी थी, तो



