
नेपाल की विनाशकारी बाढ़ ने हिमालय में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। गर्म होते हिमालय, पिघलते ग्लेशियर और GLOF का खतरा भारत के चमोली और सिक्किम जैसे पुराने हादसों की याद दिला रहा है।

चीन बड़े युद्ध की तैयारी कर रहा है। यही कारण है कि वह संभावित लंबे संघर्ष की तैयारी को अब सिर्फ पीपुल्स लिबरेशन आर्मी तक सीमित नहीं रखना चाहता। आइये जानते हैं कि इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा…

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी और ऊपरी धाराओं में हो रहे विशाल निर्माण कार्यों की ओर ध्यान खींचा है। आकलन के अनुसार ये परियोजनाएं केवल बिजली उत्पादन या व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं।

1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई गंगा जल बंटवारा संधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रही है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद को सुलझाने के उद्देश्य से बनी इस संधि को बिहार में राजनयिक सफलता नहीं, बल्कि जल संकट, गाद जमाव और विनाशकारी बाढ़ का मुख्य स्रोत माना जा रहा है।
अमेरिका में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के पीछे आखिर कौन है? ये प्रदर्शन महज भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक संगठित एंटी-इंडिया अभियान का हिस्सा हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा है कि अगर अमेरिका और यूरोपीय सहयोगी मतदान की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें तो वे चुनाव कराने को तैयार हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले भी यूक्रेन में चुनाव कराने की वकालत कर चुके हैं।
ट्रंप ने एक बार फिर होर्मुज पर अपना बड़ा दावा ठोक दिया है। उन्होंने एक नक्शा जारी कर इस समुद्री मार्ग को नए अमेरिकी क्षेत्र के रूप में दिखाया है और कहा है कि ईरान का नियंत्रण अब खत्म हो चुका है। समुद्री आंकड़े भी बता रहे हैं कि इस मार्ग पर तेहरान की पकड़ वाकई कमजोर पड़ रही है...
7 अगस्त 2026 को मक्का में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। नाटो शैली के इस गठबंधन के अनुसार किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। लेकिन इस पैक्ट से मिस्र अलग हैं, जानें क्यों
बलूचिस्तान में अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। संगठन ने महज आठ दिनों में 22 हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने का दावा किया है…
मई में अमेरिका-ईरान वार्ता शुरू होने के दौरान तेहरान की असली शक्ति संरचना का पता लगाने में परेशानी हो रही थी। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए वाइट हाउस ने कुर्दिस्तान के राष्ट्रपति बरजानी के जरिए IRGC के साथ एक गुप्त बैकचैनल स्थापित किया, जानें आगे क्या हुआ...