
2009 बैच मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अमित सिंह को भी कुछ ऐसी ही चुनौतियों और सवालों का सामना करना पड़ा था। लेकिन उन्होंने इन चुनौतियों को पार कर हिंदी मीडियम से यूपीएससी क्रैक किया है। अब उन्होंने एक इंटरव्यू के जरिए हिंदी मीडियम के उम्मीदवारों यूपीएससी क्रैक करने के कुछ टिप्स साझा किया है।

स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद तेजस्वी ने शुरुआत में बायोटेक्नोलॉजी के बारे में सुना था। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना करियर बदलने का फैसला किया और कानून की पढ़ाई की ओर बढ़ गईं।

आईपीएस विवेक राज सिंह की पत्नी वरनाली डेका 2009 बैच की असम कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। शादी के बाद विवेक राज सिंह ने पत्नी के कैडर के आधार पर अपना कैडर बिहार से असम-मेघालय ट्रांसफर करा लिया।

Who is IPS KK Bishnoi: UPSC परीक्षा में 174वीं रैंक हासिल करने वाले 2018 बैच के आईपीएस केके बिश्नोई को बिजनौर का नया एसपी बनाया गया है। संभल में अपनी धाक जमाने के बाद अब वे बिजनौर के SP बने हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से किए गए प्रशासनिक फेरबदल में संभल के एसपी रहे केके बिश्नोई का ट्रांसफर कर दिया गया है। अब उन्हें बिजनौर जिले का नया पुलिस अधीक्षक (SP) बनाया गया है। वहीं आईपीएस अधिकारी और उनकी पत्नी अंशिका वर्मा ने भी सोशल मीडिया पर उनके लिए खास पोस्ट शेयर की
नविता कुमारी एक वीडियो में बताती हैं कि उन्होंने करीब 10 साल तक कॉर्पोरेट में जॉब किया। जब जॉब के 5 साल बीत चुके थे, तब उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। हालांकि उनके लिए यह सफर आसान नहीं था।
IPS अधिकारी सिमरन भारद्वाज उन्हीं टॉपर्स में से है, लेकिन उनकी कहानी थोड़ी अलग है। उन्होंने ना सिर्फर पहले प्रयास में UPSC CDS परीक्षा में टॉप किया, बल्कि सिविल सर्विस परीक्षा भी पहली बार क्रैक कर लिया और अपनी सीडीएस की सीट छोड़ दी। चलिए आज हम आपको उनकी सक्सेस की स्टोरी के बारे में बताते हैं।
प्रयागराज में इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने स्नातकोत्तर, आईपीएस, एलएलबी ऑनर्स और एलएलएम पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अंतिम तिथि 26 अगस्त निर्धारित की है। प्रवेश निदेशक प्रो. कपिंदर ने सभी समन्वयकों को समयसीमा का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है।
UPSC Success Story: आईआईटी कानपुर से पढ़ाई और न्यूजीलैंड में 48 लाख की नौकरी छोड़ने वाली अंजलि विश्वकर्मा ने UPSC पास कर IPS बनने का सपना पूरा किया। उनकी कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा है।
स्कूल और कॉलेज में टॉपर रहीं सारिका ने JNU से पीएचडी की पढ़ाई छोड़कर UPSC की तैयारी शुरू की। शुरुआती चार प्रयासों में वह प्रीलिम्स तक पास नहीं कर सकीं। इतना ही नहीं उन्हें बीमारी ने भी खूब परेशान किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।